...साल 2015 में उस वक्त में 9वी क्लास में था। घर से 3-4 किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए जाया करता था। क्योंकि गांव में उस वक्त पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही थी। कोचिंग आने जाने के दौरान बीच में मार्केट पड़ता था। अगस्त का महीना था घर में मम्मी बोली थी की बाल कटा कर आना.. मैं सलून में बाल कटाने के लिए नंबर में लग गया। मेरे करीबी मित्र मुझे एक आदत लगा दी थी। अखबार पढ़ना.. जैसे ही मैं सैलून की दुकान पर बैठा अखबार पड़ा था। मैंने तुरंत उठा कर पढ़ना शुरू कर दिया। प्रभात खबर के दूसरे पेज के दाहिने साइड में कम से कम 200 सब दो में एक आर्टिकल लिखा था।
उसमें लिखा था "बिहार में जल्द हो सकती है शराबबंदी" यह हेडलाइन देखते ही मैं आराम से पढ़ने लगा। पढ़ने के बाद मेरे मन में एक सवाल आया? क्या बिहार में शराब बंद हो सकता है? ठीक सैलून के बगल में एक ठेका था। मैं वहां पर जाकर ठेका के बोर्ड को टुकुर-टुकुर देखने लगा। और सोचने लगा क्या यह बोर्ड अब कुछ दिनों में हट जाएगा। फिर मैंने करीबी मित्र से सवाल किया? बताओ भाई बिहार में शराबबंदी हो सकता है? उसने हंसते हुए जवाब दिया हां क्यों नहीं.. बस जिस दिन बिहार के लोग शिक्षित हो जाए हो जाएंगे उस दिन ठेका रहने से भी फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी बोला " देखो अभी जहां तहां शराब पी के मजदूर लोग मर रहे हैं। अगर नीतीश सरकार का यह फैसला है तो बिल्कुल अच्छा है ।
यह खबर पढ़ने के कुछ ही दिनों बाद मेरे घर के बगल में एक चाचा जी का शादी हो रहा था। मैंने देखा बराती के लिए चाचा जी दो-तीन कार्टून शराब मंगाए हैं। 2015 के दाम का अनुसार, लगभग 10,000 का होगा। फिर मैं अपने छोटे चाचा से पूछा - आखिर बराती लोगों को दारु क्यों बांटा जा रहा है? छोटे चाचा बड़े विनम्रतापूर्ण बोले - "नुनु बिना दारू के कोय बराती नहीं जाएगा" मैंने बोला - ऐसा भी होता है क्या? वह हंसते हुए बोले "अभी तुम बच्चे हो तीन-चार साल बाद जब तुम भी किसी का बराती जाओगे ना..तब तुम भी इसी तरह डिमांड करोगे" यह बात सुनकर मुझे अजीब सा लगा।
फिर साल 2016 में दसवीं का एग्जाम देकर मै गांव में ही गली की क्रिकेट खेला करता था। इसी दौरान सभी अखबार के फ्रंट पेज पर बोल्ट अक्षरों में एक खबर छपी थी। आज से बिहार में पूर्णता शराब बंदी लागू। यह खबर पढ़ते ही मैं उस मित्र को दौड़ते हुए खोजने चला गया। और मैंने उनसे कहा - भाई आज से 1 साल पहले नीतीश सरकार ने जो कहा था वो आज कर दिया। क्या लगता है। आज से बिहार में पूर्णता शराबबंदी हो जाएगा। उसने फिर से वही बात कहा - बस लोगों में जागरूकता होनी चाहिए। मैंने कहा देखो अब क्या होता है।
अब यहां से शुरू होती है कहानी.. नीतीश चाचा ने महिलाओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए चाहे राजस्व का घाटा क्यों ना हो जाए, बस महिलाओं का सम्मान रखना है। कर दी बिहार में शराबबंदी कानून लागू। तभी से हर दिन अखबार के पन्नों में जहरीली शराब से मौत की खबरें सुर्खियां बटोरने लगी.. विपक्षी पार्टी बस ट्विटर पर ही विरोध जताने लगे..वही, यह कानून लागु होते ही बिहार में हर दिन गोलीबारी और डकैती का ग्राफ भी बढ़ने लगा है ।
जब नीतीश चाचा BJP के साथ गठबंधन में थी उस वक्त आरजेडी के मुखिया लालू यादव और उनके काबिल पुत्र तेजस्वी यादव ट्विटर से लेकर राजभवन और डाक बंगला चौराहा तक रोजाना शराब बंदी कानून का पोल खोल रहे थे। लेकिन जैसे ही चाचा- भतीजा की जोड़ी बनी वैसे ही मुख्यमंत्री की चाह रखने वाले लालू के लाल तेजस्वी यादव मछली की तरह पलटी मार दिए। जहरीली शराब पीकर 100 लोगो की मृत्यु हो गई .. लेकिन लालू के लाल तेजस्वी कुमार के ट्वीट से एक ट्वीट तक नहीं निकला..
ये वही तेजस्वी यादव हैं। जो गला फाड़-फाड़ कर चिल्ला चिल्ला कर बोल रहे थे चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन नीतीश कुमार के साथ कभी हाथ नहीं मिलाएंगे। यह भी कह रहे थे नीतीश कुमार शराबबंदी कर बिहार के भविष्य को बर्बाद कर दिया? युवा पीढ़ी इसके बहुत जगह शिकार हुए हैं? मतलब विपक्ष में रहते हुए मीठी-मीठी बात लेकिन सत्ता में आते ही सभी बात भूल गए.
अभी हाल ही के दिनों में बिहार के सारण जिले में करीब 100 से ज्यादा लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हो गई। जबकि, अलग-अलग मीडिया या पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मृत्यु आंकड़ा कम और ज्यादा भी हो सकता है। लेकिन, तेजस्वी यादव अपने पिता के इलाज कराने के लिए सिंगापुर में बिजी दिखे?
ये वहीं नीतीश कुमार है जो महिलाओं का सम्मान रखने के लिए शराब बंदी कानून लागू किए थे? आज वही महिला अपने सम्मान के लिए चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है "नहीं चाहिए मुझे ऐसा शराबबंदी कानून जहां मेरा सुहाग ही न रहे' यह पुकार सारण में जहरीली शराब से मौत हुई, एक विधवा पत्नी की है । वही इस जघन्य घटना को लेकर बिहारवासी का कलेजा ठंडा भी नहीं हुआ था की उधर, नीतीश कुमार विधानसभा में चिल्ला चिल्ला कर कहने लगे "अरे भाई शराब तो गंदी चीज है..जो पिएगा वह मारेगा इसमें हम रुपैया क्यों दें?
मुझे एक बात समझ में नहीं आ रहा है आखिर शराबबंदी कानून बिहार में क्यों लागू हुआ? अगर लागू हुआ तो सही ढंग से पालन क्यों नहीं हुआ? क्या सरकार शराबबंदी कानून लागू करने में विफल हो गई? या फिर लोगों में जागरूकता की कमी रह गई.. सवाल यह भी है की बिहार के सीमावर्ती राज्यों से शराब की बड़ी-बड़ी खेपे कैसे पकड़ी जा रही है? सवाल तो बहुत है?
अगर आप 2016 से 2022 तक का डाटा देखें तो एबीपी न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में जहीरीली शराब पीने से सबसे ज्यादा 2021 में 90 मौतें हुई थी। राज्य में 2020 में, 2019 में 9, 2018 में 9, 2017 में 8 और 2016 में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 2022 में अब तक 100 से ज्यादा लोग जहरीली शराब पीने की वजह से मारे गए हैं।
सबसे आखरी बात.. क्या बिहार में इसी तरह मौतों का आंकड़ा बढ़ता रहेगा या फिर नीतीश चाचा अपनी जिद से हट कर इस नियम में कुछ बदलाव करेगी? क्या सत्ता के लालच में तेजस्वी यादव इस कानून को हटा पाएंगे? क्या विपक्षी पार्टी इस सत्ताधर पार्टी के इस गंदे कानून को हटाने में जनता का मदद करेगी?


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