देशवासी कोरोना से लड़ रहे है। और सरकार चुनाव से...!

 


देश इन दिनों कोरोना कि दूसरी मार झेल रहा है। लेकिन, जो भयानक स्थिति पिछले वर्ष चीन, इटली ,अमेरिका में था। आज वही स्थिति पूरे भारत में बनी हुई है। कई लोग ऑक्सीजन के बगैर मर रहे हैं, कई लोग हॉस्पिटल पहुंचने से पहले एंबुलेंस में दम तोड़ रहे हैं, तो कई लोग कोरोना के भय से ही मर रहे है। आलम यह है, कि शव जलाने के लिए शमशान घाट कम पड़ गए हैं। दफनाने के लिए कब्रिस्तान छोटे पड़ रहे हैं। सवाल यह उठता आखिर देश में इतना भयानक स्थिति आई तो आई कैसे। 

शायद, आप लोग यह बात भी जानते होंगे जो देश पिछले वर्ष कोरोना के चलते बर्बाद हो चुका था। अभी वह देश सुचारू रूप से चल रहा है। और भारत तबाही की ओर अग्रसर है। जबकि भारत में वैक्सीन भी आ चुका है। आखिर क्या वजह है जो सिर्फ भारत में ही कोरोना का इतना अातंक मचा हुआ है। क्या जनता पिछली बार कोरोना को गंभीरता पूर्वक से नहीं लिए थे, या फिर उस समय कोरोना को सही तरह से समझ ही नहीं पाये थे।

जबकि, इस वर्ष देशवासियों को संभालने के लिए 1 वर्ष का अवसर भी मिला था। कारण तो अनेकों है। परंतु , सरकार भी तो कोरोना को लेकर सचेत नहीं है।  जो इस समय यह भयानक स्थिति देखने को मिल रहा है। हॉस्पिटल में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है। एडमिट के लिए बेड नहीं मिल पा रहा है। सही ढंग से देश में कोरोना का जांच भी नहीं हो रहा है। आखिर सरकार अपनी जिम्मेदारियां कब संभालेगी।

क्या इस कोरोना काल मे चुनाव प्रचार करना उचित है। जहां  देश के प्रधानमंत्री एक ओर जनता को 2 गज दूरी बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। तो वही एक ओर बंगाल चुनाव में बगैर मास्क ,सोशल डिस्टेंसिंग के लाखों जनता के बीच चुनाव प्रचार कर रहे हैं। क्या इस समय चुनाव प्रचार करना संभव है। या फिर वाकई में बंगाल में कोरोना का संक्रमण पहुंचा ही नही? 

हर दिन देश में कोरोना के लाखों नए मामले सामने आ रहे हैं। जबकि, उनमें से हजार लोगों की प्रतिदिन मौतें हो रही है। इनमें से ज्यादातर मौतें हॉस्पिटल में ही हो रही है। क्योंकि वहां पर्याप्त संसाधन ही उपलब्ध नहीं है। आखिर सरकार स्वास्थ्य मामले में इतना फिका साबित क्यों हो रहा है।? जहां एक और स्वास्थ्य को लेकर नए नए बजट पेश किए जाते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ मरीजों को अस्पताल मे भर्ती होने के लिए जगह कम पर है। 

लॉकडाउन के चलते बिहारी प्रवासी मजदूर का फिर से वही रवैया चालू हो गया है। डेली मजदूर लोग अपना बोरिया बिस्तर लेकर दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों से पलायन करने पर विवश हो रहे है। क्योंकि, उन लोगो को पता है पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी वही हाल होने वाला है। इसीलिए पहले से ही सतर्कता बरतते हुए शहर छोड़ने पर मजबूर हो रहा है।

देश में कोरोना का वैक्सीन आ जाने के कारण कुछ लोग सतर्कता बरतने से जुगलबंदी कर रहे हैं। उन लोगों को ऐसा लग रहा है जैसे वैक्सीन का डोज लेने से खतरा टल जाएगा। शायद, अब देश के नागरिक को समझना होगा। 

कोरोना से बचने के लिए अब कुछ ही उपाय बचे हैं। जैसे:-

1. सरकार के भरोसे मत बैठिए (पुराना डायलॉग है)

2. अपनी सुरक्षा स्वयं कीजिए (जैसे ट्रेन में लिखा होता है)

3. कभी भी किसी नेता के भीड़ का हिस्सा ना बने.

4. 2 गज दूरी मास्क है जरूरी सेनीटाइजर को मत भुलिए.

5. कोरोना के लक्षण महसूस हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चेकअप करवाएं.

6. कोरोना के नकारात्मक विचार अपने दिमाग से हटा दें.

सबसे बड़ा चिंतित का विषय है इस कोरोना के चलते बेरोजगारी हो जाना + महंगाई की मार..आखिर लोग कैसे जीवित रहेगा। 

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आलेख:- सुमन सौरब....



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