आखिर हमारा समाज "अश्लीलता" भोजपुरी गीत की ओर क्यों जा रहा है आखिर कौन जिम्मेवार है!

 



भारतवर्ष में यह बात किसी से छुपा नहीं है। की बिहार में सिर्फ भोजपुरी भाषाएं ही बोली जाती है। क्योंकि जब कोई बिहार का आदमी दूसरे राज्यो में अपना परिचय का माध्यम बनता है। तो उस समय सामने बाले आदमी को ऐसा प्रतीत होता है, कि वह व्यक्ति भोजपुरी भाषा में बोल रहा है। लेकिन यह सत्यता नहीं है। भले ही भारत के संविधान में 22 भाषाओं के उल्लेख में मैथिली को जोड़ दिया गया हो।  लेकिन बिहार के अलग-अलग प्रांतों में तरह-तरह के भाषाएं बोली जाती है। अगर हम बात करें बिहार मे भोजपुरी भाषा बोलने वाले क्षेत्र की तो भाषाएं कई जिलों में बोली जाती है। जैसे बिहार के बक्सर, सारण, छपरा, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण, वैशाली, भोजपुर, रोहतास, बक्सर, भभुआ आैर अासपास के इलाकों में भोजपुरी बोली जाती है। लेकिन इसके अलावा अलग-अलग जिलों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती है। जैसे:- अंगिका, मंजूषा, मगही, मैथिली इत्यादि। 


यानी आप कह सकते हैं कि बिहार में सिर्फ भोजपुरी भाषाएं नहीं बोली जाती है। लेकिन यह बात भी किसी से छुपा नहीं है कि वर्तमान बिहार में भोजपुरी भाषा के नाम पर भोजपुरी गीतो के माध्यम से समाज मे अश्लीलता फैलाई जा रही है। मतलब आप कह सकते हैं कि गायन के माध्यम से भाषा का अपमान किया जा रहा है। भोजपुरी गाना धीरे-धीरे इस कदर अश्‍लीलता की सारी हदें पार करता जा रहा है। कुछ भोजपुरी कलाकार तो ऐसे हैं जो इस भाषा में अश्‍लीलता का जहर घोल रहे हैं। हालात ऐसे आ गए हैं कि कुछ भोजपुरी सिंगर भगवान, महान पुरुष, विभिन्न राजनेताओं को भी नहीं छोड़ते हैं। उसके प्रति भी कई अश्लील गाने गा चुके हैं। यही भोजपुरी सिंगर दिनों दिन समाज में पॉपुलर बनता दिख रहा है। मतलब वर्तमान समाज के लोग समाज में अश्लीलता फैलाने में मदद कर रहे हैं। 

    यह वही मीठी भोजपुरी भाषा है, जो भाषाई परिवार के स्तर पर एक आर्य भाषा दुसरा रूप हैं। इस भाषा का विस्तार विश्व के सभी महाद्वीपों पर है। तथा पूरे भारतवर्ष में लगभग 3.3 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं। अगर बात करें पूरे विश्व की तो पूरे विश्व में भोजपुरी जानने वालों की संख्या लगभग 5 करोड़ के आसपास है। लेकिन आज वही भाषा अश्लीलता के नाम पर विलुप्त होने की कगार पर है। अगर हम बात करें भोजपुरी भाषा की इतिहास की तो यह भाषा एक हजार से अधिक साल पुरानी है। 

भोजपुरी भाषा का इतिहास 7वीं सदी से शुरू होता है। गुरु गोरख नाथ ने 1100 वर्ष में गोरख बानी लिखा था। संत कबीर दास 1297 का जन्मदिवस भोजपुरी दिवस के रूप में भारत में स्वीकार किया गया है। अगर बात करें उत्पत्ति की तो यह भाषा का नामकरण बिहार के आरा शाहाबाद जिले में स्थित भोजपुर नामक गांव के नाम पर ही हुआ है। पूर्ववर्ती आरा जिले के बक्सर में भोजपुर नाम का एक बड़ा परगना है, जिसमें नवका भोजपुरा् और पुरनका भोजपुरा् दो गाँव हैं। मध्य काल में इस स्थान को मध्य प्रदेश के उज्जैन से आए भोजवंशी परमार राजाओं ने बसाया था। उन्होंने अपनी इस राजधानी को अपने पूर्वज राजा भोज के नाम पर भोजपुर रखा था।

इसी कारण इसके पास बोली जाने वाली भाषा का नाम भोजपुरी पड़ गया। लेकिन वर्तमान समय में भोजपुरी भाषा में तरह-तरह के अश्लील गाने बनाकर समाज में परोसे जा रहे हैं। विडंबना की बात यह भी है वर्तमान समाज उस गाने को स्वीकार भी कर रहा है। दिनों दिन यह विषय संकट का बनता दिख रहा है।

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