वैलेंटाइन डे स्पेशल... वैलेंटाइनडे वाला_प्यार💓

 


हमारे समाज में ऐसा कहा जाता है.. कि दुनिया का सबसे अटूट रिश्ता, प्यार होता है। और जिससे हम प्यार करते हैं। वैसै वर्तमान स्थिति में अगर प्यार को देखा जाए तो प्यार भी व्याकरण की तरह कई प्रकार के होते हैं।


 लेकिन ई #वैलेंटाइन_डे वाला प्यार व्याकरण से भी अलग है। क्योंकि मुल रूप से इसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। (विदेश छोड़कर).

आखिर वैलेंटाइन डे का मतलब क्या होता है.. 

क्यों दो आशिक इस दिनों का बेसब्री से इंतजार करते हैं.. 

वैसे अगर देखा जाए तो वर्तमान आशिकों पर एक नकली प्यार का नशा सा छा गया है। नाबालिग अवस्था में ही #अट्रैक्शन को प्यार समझ बैठते है। 


जो लोग वैलेंटाइन डे मनाते हैं !

आशिकों के अनुसार :- प्यार दुनिया का हर बंधन से बना होता है, अगर प्यार न हो, तो जिन्दगी में खुशियाँ नहीं हो सकती, वैसे प्यार का इज़हार कभी वक्त या मुहूर्त देखकर नहीं किया जाता, प्यार अहसास का एक ऐसा समुंदर है, जिसमे अगर तूफ़ान भी आये, तो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता. प्यार त्याग, विश्वास की एक ऐसी डोर है, जिसे बस महसूस कर सकते है, जिसे शब्दों में पिरोना आसान नहीं. ऐसे ही प्यारे अहसास को हम एक त्यौहार (Valentine Day) के रूप में मनाते है। 

वाह क्या बात है !

यह चंद पंक्ति को वो लोग #लैला_मजनू वाला प्यार समझ बैठे है। 


अब सोचने वाली बात यह है.. आखिरकार वैलेंटाइन डे ज्यादातर दो आशिक लोग ही क्यों मनाते हैं..

क्योंकि, ऐसा कुछ जिक्र तो नहीं है।  की सिर्फ दो लैला मजनू ही #Valentine_Day को मनाएं..


अब मुद्दे की बात आती है...!!!


अगर वर्तमान स्थिति को देखा जाए तो प्यार एक अटूट रिश्ता को आजकल के आशिक अश्लीलता में बदलने को वैलेंटाइन डे कहते हैं।

 क्योंकि यह बात किसी से छुपा नहीं है. "वैलेंटाइन डे"  के दिन सिर्फ अश्लीलता के अलावा और कुछ नहीं फैलाया जाता है।


 वैसे नाबालिग लड़के और लड़कियां जो अपने माता पिता के लिए प्यार नहीं लेकिन बॉयफ्रेंड के लिए स्पेशल प्यार वाह यही तो "वैलेंटाइन डे" बला प्यार..


अगर सही मायने में देखा जाए तो वैलेंटाइन डे के दिन सिर्फ लड़कियों का शोषण होता है.. जो भुगतना उसके पेरेंट्स को परता हैं। 

क्या यह हमारे समाज के लिए ऐसा त्यौहार जरूरी है..!


आखिर क्यों "वैलेंटाइन डे"  के नाम पर दो लैला मजनू अपने समाज को गंदा करना चाहते हैं. आखिरकार "वैलेंटाइन डे" मनाने का हमारा उद्देश्य क्या है.. 

हमारा समाज वैलेंटाइन डे मना कर किस दिशा में जा रहा है. आगे आने वाले पीढ़ी को क्या शिक्षा देगा..


हमारे समाज में विवाह को ही सबसे अटूट रिश्ता माना जाता है. क्योंकि जिससे एक बार हो जाए उससे जन्मो जन्मो तक नाता जुड़ा रह जाता है. 


और आजकल तो शादी से पहले ही वैलेंटाइन डे वाला प्यार होता है‌ !!


एक बात तो साफ है...😓

जब तक हम लोग चमड़ी का पुजारी रहेंगे...तब तक समाज में ऐसे ही अश्लीलता बला पर्व वैलेंटाइन डे उत्पन्न होता रहेगा....

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