इस वैश्विक करोना महामारी में गरीबों का मसीहा बनकर सोनू सूद जिस तरह से गरीब मजदूरों का मदद कर रहे है | वह काबिले ऐ तारीफ है | उनके सहरनीय की चर्चा पूरे भारत देश मे ही नहीं बल्कि पूरे दुनिया हो रही है | लेकिन कुछ बॉलीवुड एक्टरो तथा भोजपुरी एक्टरों को साउथ के एक्टरों से कुछ सीख लेना चाहिए | जितना धन, पैसा, शोहरत इन गरीबों के पैसा से बनाए हैं | उसका 2% हिस्सा भी आज तक गरीबों मे खर्च तक नहीं किए हैं |
तो आखिर क्यों हम लोग इन जैसे गरीबों को अपना हीरो मान लेते हैं | कम से कम साउथ के एक्टर सोनू सूद से सीखना लेना चाहिए | भले ही सोनू सूद फिल्मों में विलेन का रोल निभाते हैं | लेकिन असली हीरो तो इसे ही कहते हैं | क्या इन भोजपुरी जोकरों को इतनी भी औकात नहीं कि प्रवासी मजदूरों को कम से कम एक बस करके गंतव्य स्थान तक पहुँचा सके | यही मजदूरों की बदौलत ये लोग स्टार और नेता बने हैं | जो मजदूर समाज इनके गाने फिल्म सबसे अधिक देखता है | वैसे हीरो आज घर में दुबक कर बैठे हैं | हँसी तो तब आती है जब इन जैसे लोग स्टेज शो अपना इंटरव्यू देते हैं | 1 घंटा के शो में 40 मिनट ये बोलने में लगा देते है कि आज मैं जो कुछ भी हूं, वह आपकी बदौलत हूँ |
क्या इनकी ज़िम्मेदारी भोजपुरी समाज में अश्लीलता का प्रचार करने तक ही सीमित है ?



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