2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 45.36 करोड़ लोगों एक से दूसरे राज्य में पलायन किये है।जिनमें 5.68 लाख सिर्फ बिहार के मजदुर है। जो काम की तलाश में उत्तर प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात आदि स्थानों की ओर का पलायन करने पर बिवश हो जाते है।
• दुसरा सबाल:-
आखिर कब तक बिहारी मजदूर एक राज्य से दूसरे राज्य पलायन पर विवश रहेंगे।
दूसरे राज्य के लोग कहते हैं। बिहार एक बीमारू राज्य है। इस बात पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। कि जो बिहार आजादी के समय मे अत्यंत विकसित राज्य हुआ करता था। मगर फिर ऐसा क्या हुआ कि बिहार राज्य आर्थिक क्षेत्र में देश का प्रतिनिधित्व करने की जगह आर्थिक क्षेत्र में देश का बोझ बन कर रह गया। आखिर इस परिस्थिति का जिम्मेदार कौन है?
बिहार में 1930 के दशक से ही चुनाव हो रहे हैं। पूरे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार ने देश को बेहतरीन राजनीतिक नेतृत्व दिया है। मगर........कुछ नहीं हुआ।
बिहार के पीछे रह जाने का मुख्य कारण यहां की राजनीतिक स्थिति हैं। बिहार में जाति आधारित राजनीति के कारण ही बिहार के नेता यहां के विकास पर ध्यान नहीं दे रहा है मगर फिर भी सोचने वाली बात यह है। 1977 के पहले जब राजनीति विशेषतः जाति आधारित नहीं थी। तब भी बिहार का विकास नहीं हुआ करता था।
• वर्तमान बिहार में निम्नांकित चीजों की जरूरत है।
1. अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था......... 2. लचार शिक्षा व्यवस्था को ठीक करना...... 3. बेरोजगार युवाओं को रोजगार........ 4. पलायन करने बाले मजदूरों को अपने ही राज्य में रोजगार देना......
5. हर साल आने वाले भीषण बाढ़ को रोकने का उपाय
मगर सूबे में 15 साल सरकार रहने के बावजूद भी एक भी वादे पूरे नहीं हुए है। फिर भी जनता खुश है।
✍🏻 सुमन सौरब............

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