वर्तमान में बिहार के प्रवासी मजदूरों की स्थिति गली के कुत्तों से बत्तर हो गई है। ना रहने का ठिकाना, ना खाने का ठिकाना, और ना कमाने का ठिकाना .....फिर भी जैसा भी है। अपना बिहार है। और हमे बिहारी होने पर गर्व है।
गर्व क्यों ना हो जब 10-15 हजार रूपये कमाने के लिए दूसरे राज्य जाना पड़े। अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी दूसरे राज्य जाना पड़े। अच्छे इलाज के लिए भी दूसरे राज्य जाना पड़े।
लेकिन अपने सुबे के मुख्यमंत्री नीतीश बाबू से नहीं पूछते हैं। की हम सभी बिहार वासी आपको 15 वर्षों से इसीलिए नहीं कुर्सी पर बैठा रहे हैं। ताकि हमें यह दिन देखना ना पड़े।
जब चुनाव का वक्त आता है। तब हम और आप जैसे पढ़े-लिखे लोग 500-1000 में बिक जाते हैं। सरकार से सवाल तक नहीं करते हैं। अपने नजदीकी जनप्रतिनिधियों से बात करने से डरते है। आखिर ऐसा क्यों?
जब तक हम और आप जैसे लोग इन निकम्मो को वोट देते रहेंगे। तब तक यही हाल होता रहेगा।
जो बिहार प्राचीन काल में विश्व विख्यात हुआ करता था। वह आज राजनीतिक, जातिवाद, मूर्खता के कारण बर्बाद हो चुका है। 10 करोड़ जनसंख्या में महज 600 सरकारी बसें चलती है।
भारत में बिहार का इतिहास प्राचीन काल में एक हुआ करता था। जो बिहार प्राचीन में मगध के रूप में जाना जाता था। वह बिहार आज दलालपानी के नाम से जाना जाता है। 1000 वर्षो तक शिक्षा, संस्कृति, शक्ति और सत्ता का केंद्र रहा करता था। वह बिहार आज भारत में सबसे कम साक्षरता वाला राज्य गिनती में आता है।
वह आज विलीन हो गया.......
भारत को पहले मुसलमानों ने लूटा ,फिर अंग्रेजों ने शासन किया। और वर्तमान में राजनीतिक पार्टी लोग भारत को गुलाम बनाना चाहते हैं। हर बार भारत पर शासन हो रहा है। लेकिन किसी को समझ में नहीं आ रहा है। क्योंकि हम लोग मूर्ख हैं।
उनमें से बिहार अहम भूमिका निभाता है।
✍🏻:- सुमन सौरब...........

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