बिहार वासियों के लिए यह बहुत बड़ी विडंबना की बात है। पहले बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का कहना था। हम लॉक डाउन का उल्लंघन करके बिहारी प्रवासी मजदूर को वापस नहीं बुला सकते हैं। तथा उनका कहना ये भी था। जो भी राज्य सरकार लॉक डाउन की घड़ी में अपने राज वासियों को बुला रहा है।
वह राज्य लॉक डाउन का खुला उल्लंघन कर रहा है। मगर अब तो गृह मंत्रालय का आदेश आ चुका है। भारत मे जितने भी अलग अलग राज्य में फंसे मजदूर, छात्राएं, पर्यटक लोग हैं। उनके लिए राज्य सरकार व्यवस्था करें।
तो अब क्यों बिहार के उपमुख्यमंत्री का कहना है। मेरे पास उपयुक्त संसाधन नहीं है। मैं प्रवासी मजदूर को लाने में असमर्थ हूं। मेरे पास पर्याप्त बसें नहीं है।
अब सोचने वाली बात यह है। आखिर बिहार में कितने सरकारी बसें हैं। क्या बिहार में सरकारी बसे चलती ही नहीं है। आखिर बिहार मे 15 वर्षों से सिर्फ सत्ता का खेल चल रहा था।
जनता का सवाल......????
जब आप चमकी बुखार को रोक नहीं सकते हैं। हर वर्ष आने वाले बाढ़ को नहीं रोक सकते हैं। बिहार में मजदूरों के लिए फैक्ट्री नहीं लगवा सकते हैं। बिहार के लाचार शिक्षा व्यवस्था को नहीं सुधार सकते हैं। सही ढंग से शराबबंदी नहीं करवा सकते हैं। तो आखिर आप कर क्या सकते हैं?
सिर्फ नए-नए योजनाएं के नाम पर "बड़े-बड़े मानव श्रृंखला" आपके जनसैलाब तक पहुंचने के लिए "दो दो हजार बसें" आखिर इतना पैसा कहां से आ जाता है।
मगर अब बात बिहार के जनता को बचाने प
की आ रही है। तो आप पीछे हट रहे हैं। बहाने बना रहे हैं।
बिहार का जनता आपसे अपना हक पूछ रहा है।
✍🏻 सुमन सौरब......🙏

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