इस महामारी के पर्व मे कुछ भड़ास निकालना मेरी कुछ मजबूरी नहीं हैं।

 
क्या दिया हमे उन नेताओं ने जो आगामी आने वाले चुनाव में कहेगा कि......👇👇
"मैंने ये किया" "वो किया"
और आप मुझे वोट दीजिए। 

महान महान बुद्धिजीवी तथा माताएं है।
#सांसद बने, #विधायक बने, #मुखिया बने, #वार्ड सदस्य बने।

ये वही लोग हैं। जो चुनाव के वक्त हाथ फैलाकर चरण पकड़कर गिरगिरा कर हम लोगों का 1 कीमती वोट चुराते हैं। तथा चुनाव खत्म होते ही कोई फ्लाइट से तो कोई फोर व्हीलर से निकल पड़ते हैं। टूर के लिए.... जैसे:- मुंबई, दिल्ली पटना इत्यादि।
और अंत में एक आशियाना घर में छुप जाते हैं।  और कहां गया जनता और कहां गई हुकूमत 5 साल तक बस मस्ती ही मस्ती ................
  बेचारा भुगता कौन वहीं लाचार, निम्न मध्यमवर्गीय मजदूर लोग जो चुनाव के वक्त आस लगाए बैठते रहते हैं। बिजली की समस्या ठीक हो जाएगी। गांव में गली-गली रोड बन जाएंगे। कचरा निकालने के लिए नाला बन जाएंगे। छोटे बच्चे इधर-उधर ना भटके इसके लिए मैदान बन जाएंगे। बिटिया गांव के हाई स्कूल में पढ़े हैं। उसको दूसरे गाँव ना जाना पड़े।
और अंत में वही जो हर चुनाव के बाद मिलता है।
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इस वैश्विक महामारी के दौर में पूरे दुनिया कठिनाइयों का सामना कर रहा हैं। सामाजिक कार्यकर्ता लोग एक दूसरे को सहायता दे रहे हैं। ताकि किसी का घर परिवार भूखा ना सो जाए। मगर हमारे पंचायत के आदरणीय मुखिया जी वार्ड 16 प्रवेश तक नहीं किए। 
जिस तरह एक पति पत्नी का रिश्ता अटुट होता है। उसी तरह पंचायत से मुखिया का लगाव होना चाहिए।
सिर्फ सैनिटाइजर छिरकाव करवाने से मनहूस करोना भाग नही जाएगा। कम से कम लोगों का दुख,  हालचाल जाने के लिए भी वार्ड 16 का बॉर्डर प्रवेश कीजिए। 

हमारे गांव में कुछ जनप्रतिनिधि लोग मास्क वितरण करके अपने आप को भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। 
खैर अब बात करते हैं। विधायक जी का बहुत से लोग उनका नाम भी भूल गए होंगे। हमारे विधायक कौन थे। जितने के पूरे 4 साल होने को है। मगर दिखाई..... (आप समझ गए होंगे)

 याद है ना जब बेगूसराय में कन्हैया और गिरीराज का नाम चल रहा था। 
कहां गए अभी बेगूसराय के सांसद गिरिराज बाबू शायद चमचों को पता होगा।

*कुछ भक्त ,चमचे लोगों को यह पूरी बात मिर्ची की तरह लगेगी*
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