आज पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. खासकर महिला सुरक्षा को लेकर अगर यही बात में वर्तमान भारत की करूं तो बहुत ही निंदनीय है.प्राचीन काल में महिलाओं को बहुत सम्मान किया जाता था. परन्तु जैसे-जैसे समय बीतता गया. इनकी स्थिति में काफी बदलाव आता गया. लड़कियों के प्रति लोगों की सोच बदलने लगी थी. बालविवाह, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या इत्यादि. भारत में काफी प्रचलित होती गई. इसी कारण लड़कियों को शिक्षा, कानूनी अधिकार और चिकित्सा जैसे अधिकारों से वंचित रखा जाने लगा. लेकिन अब इस आधुनिक युग में लड़कियों को उनके अधिकार देने और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं. भारतीय सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है. और कई योजनायें लागू कर रही है. जैसे "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" लेकिन फिर भी योजना लोगों तक जागरूक नहीं कर पा रही है. इसका नतीजा वर्तमान समय की बालिकाएं भुगत रही है. टीवी में, न्यूज़पेपर में हर रोज बालिकाएं के शोषण का परिणाम आ रहा है. आखिर लोगों में जागरूकता क्यों नहीं फैल रही है. आखिर कब तक बालिकाएं शोषण होती रहेगी. सरकार तो लोगों को जागरूक करने में सफल बता रही है.देश में महिला हर क्षेत्र में पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर देश के विकास में अपनी बराबर की भागीदारी निभा रही है. ऐसे में उनके साथ समाज में हो रहा भेदभाव किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता है.आज जरूरत है. हमें महिलाओं को प्रोत्साहन देने की तभी सही मायने में देश विकास कर पायेगा व राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाना सार्थक हो पायेगा.........
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